लालची सेठ और नौकर की कहानी | Greedy Seth Moral Story in Hindi

हेलो दोस्तों Hindi Canvas मैं आप सब लोगों का स्वागत है। आज जो कहानी सुनाने जा रहा हूं उसका नाम है लालची सेठ और नौकर की कहानी। तो चलिए शुरू करते है आजका कहानी Greedy Seth Moral Story in Hindi | लालची सेठ और नौकर की कहानी

Greedy Seth Moral Story in Hindi | लालची सेठ और नौकर की कहानी

एक बार धनी चंद नाम का एक सेठ था। वह बहुत कंजूस था। उसके पास कोई भी नौकर ज्यादा दिन तक टिकता नहीं था। क्योंकि वह सेठ किसी को काम पर रखने से पहले नौकर के सामने तीन शर्त रख देता था। जिसको कोई भी पूरी नहीं कर पाता था। एक दिन मदन नाम का एक लड़का सेठ के पास नौकरी मांगने आया।

वह सेठ से बोला वह बहुत दूर से आया है। इसलिए उसको कुछ नौकरी दे दे। सेट बोला ठीक है मैं तुमको नौकरी पर तोह रख लूंगा लेकिन मेरी तीन शर्ते है। मदन ने शर्त पूछी सेट बोला : पहली शर्त तुमको दिन में या रात में जब भी मैं कोई काम बोलूं तुमको वह करना पड़ेगा। दूसरी शर्त तुमको दिन में केवल एक बार ही भोजन मिलेगा। तीसरी शर्त यदि तुम खुद नौकरी छोड़ कर जाते हो तो तुमको मुझे 1 साल का पैसा देना पड़ेगा।

मदन सेठ की सारी शर्त मान गया। सेठ बहुत कंजूस था वह मदन को गोदाम से भारी-भारी बोरिया लाने को कहा था। और दिन में केवल एक बार सूखा भोजन देता था। जिससे वह दिन प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा था। कुछ दिन तक ऐसा ही चलता रहा। 1 दिन सेठ की बीवी ने उसके भोजन में बहुत कम रोटी दी। मदन ने बोला इतना काम करने के बाद इतना कम भोजन।

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तो सेठ ने बोला तू काम ही कितना करता है। मदन कुछ दिन बाद सेठ से नौकरी छोड़ने को बोला। सेठ ने उसको शर्त याद दिलाई। मदन ने अपनी मां के कंगन बेचकर सेठ को पैसे दिए और गांव लौट आया।

एक दिन गांव में मदन को उसका दोस्त रमेश मिल गया। रमेश ने मदन से परेशानी का कारण पूछा तो मदन ने सारी बात रमेश को बता दी। रमेश ने सारी बात सुनकर सेट का पता पूछा और मदन को चिंता ना करने को कहा। रमेश सेठ के पास गया और उससे काम मांगा।

सेठ ने उसको वही तीन शर्ते बताएं तोह रमेश ने बोला सेठ जी मैं तो आपकी तीन शर्त मानने के लिए तैयार हूं, लेकिन आपको भी मेरी एक शर्त को मानना होगा। यदि आप मुझ को नौकरी से निकालते हैं तो आपको मुझे 1 साल की पगार देनी होगी। सेठ ने सोचा ऐसी नौबत ही नहीं आएगी और उसकी बात मान लिया।

रमेश कुछ दिन तक काम करता रहा। 1 दिन सेठ ने रमेश को बोला जाकर गोदाम से एक बोरी लेकर आओ, फिर उस में ताला लगा देना। उसने सेठ को सबक सिखाने की सोची। उसने बोरी निकालने के बाद गोदाम का ताला बंद नहीं किया। जिससे चोर उसकी सारी बोरी लेकर चले गए। सेठ ने अगले दिन रमेश से पूछा तो रमेश बोला उसने तो ताला लगाया था शायद चोर ताला भी तोड़ कर ले गया।

एक दिन सेठानी ने रमेश को बाजार से लकड़ी का गठन लाने को कहा। लकड़ी लाने के बाद रमेश ने पूछा यह लकड़ी का गठन कहां पर रखो। सेठानी ने गुस्से में बोला मेरे सिर पर रख दे। रमेश ने ऐसा ही किया लकड़ी का गट्ठर सेठानी के सिर पर रख दिया। जिससे सेठानी चिल्लाई और फिर सेठ ने रमेश को नौकरी से जाने को कहा।

रमेश ने सेठ को शर्त याद दिलाई। सेठ उसको पैसे देने लगा तब रमेश ने सेठ को सारी बात बता दी, की वह अपने दोस्त मदन का बदला लेने के लिए वाहा पर आया है। उसने सेठ से मदन के पैसे लौटाने को कहा। सेठ ने रमेश को मदन के पैसे लौटा दिए। रमेश ने गांव आकर पैसे मदन को दिए। जिससे मदन बहुत खुश हो गया।

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