दिमाग की दुकान एक प्रेरक कहानी | Brain Shop Motivational Short Story in Hindi

Motivational Short Story in Hindi: हेलो दोस्तों Hindi Canvas मैं आप सब लोगों का स्वागत है। दोस्तों, आज जो कहानी सुनाने जा रहा हूं उसका नाम है दिमाग की दुकान एक प्रेरक कहानी । यह कहानी आशा करता हूं कि आपको बेहद पसंद आयेगा। तो चलिए शुरू करते है आजका कहानी Brain Shop Hindi Motivational Story | दिमाग की दुकान एक प्रेरक कहानी

दिमाग की दुकान एक प्रेरक कहानी | Brain Shop Motivational Short Story in Hindi

एक गांव में एक लड़का था जिसका नाम था रौनक, जैसा नाम वैसा रूप। दिमाग मैं भी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। एक दिन उसने घर के बाहर बड़े बड़े अक्षरों में लिखा यहां पर दिमाग मिलता है। उसका घर बाजार के बिच मे था। और आने जाने वाला वहां से जरूर गुजरता था।

हर कोई बोर्ड देखता हंसता और आगे बढ़ जाता है। रोनक को विश्वास था कि उसकी दुकान एक दिन जरूर चलेगी। एक दिन एक अमीर महाजन का बेटा वहां से गुजर रहा था तभी दुकान देख कर उसे रहा नहीं गया। उसने अंदर जाकर रोनक से पूछा यहां कैसी दिमाग मिलती है।

और उसकी कीमत क्या है। उसने कहा यह इस बात पर निर्भर करता है कि तुम इस पर कितना पैसा खर्च कर सकते हो। गब्बू ने जेब से ₹1 निकाल कर पूछा इस रुपए के बदले कौन सी दिमाग मिलेगी और कितनी। रौनक ने कहा भाई ₹1 की दिमाग से तुम ₹100000 बचा सकते हो।

गब्बू ने ₹1 दे दिया बदले में रौनक ने एक कागज पर लिख कर दिया “जहां दो आदमी लड़ झगड़ रहे हो वहां खड़े रहना बेवकूफी है”।गब्बू घर पहुंचा और उसने अपने माता-पिता को कागज दिखाया। कंजूस पिता ने कागज पड़ा तो वह गुस्से से आगबबूला हो गया। गब्बू को कोसते हुए वह पहुंचा दिमाग की दुकान।

कंजूस पिता कागज की पर्ची रौनक के सामने फेंकते हुए चिल्लाया ₹1 लौटा दो जो मेरे बेटे ने तुम्हें दिया था। रोनक ने कहा ठीक है लौटा देता हूं। लेकिन शर्त यह है कि तुम्हारा बेटा मेरी सलाह पर कभी अमल नहीं करेगा। कंजूस महाजन के वादा करने पर रोनक ने रुपया वापस कर दिया।

उस नगर के राजा की 2 रानी थी। एक दिन राजा अपनी रानियों के साथ जोहरी बाजार से गुजर रहा था। तभी दोनों रानियों को हीरो का एक हार पसंद आ गया।

दोनों ने सोचा महल पहुंचकर अपनी दासी को भेजकर मंगवा लेगी। संयोग से दोनों दासिया एक ही समय पर लेने पहुंचे। बड़ी रानी की दासि बोली मैं बड़ी रानी की सेवा करती हूं इसलिए हार में लेकर जाऊंगी। छोटी रानी की दासी बोली राजा तो छोटी रानी को ज्यादा प्यार करते हैं इसलिए मेरा हक है।

गब्बू उसी दुकान के पास खड़ा था उसने दोषियों को लड़ते हुए देखा। दोनों दासि ने कहा वे अपनी रानियों से शिकायत करेगी। जब बिना फैसले के वे दोनों जा रही थी तब उन्होंने गब्बू को देखा। और कहा यहां जो कुछ भी हुआ तुम उसके गवाह रहना।

दासियो ने रानी से और रानियों ने राजा से शिकायत की। राजा ने दसियों की खबर ली दसियों ने कहा गब्बू से पूछ लो वह वहीं पर मौजूद था। राजा ने कहा बुलाओ गब्बू को गवाही के लिए। कल ही झगड़े का निपटारा होगा। इधर गब्बू हैरान पिता परेशान आखिर दोनों पहुंचे दिमाग की दुकान। माफी मांगी और मदद भी।

रोनक ने कहा मदद तो मैं कर दूं पर आप जो मैं दिमाग दूंगा उसकी कीमतें ₹5000। मरता क्या न करता उस पिता ने फिर उसे ₹5000 दिया। रोनक ने कहा की गवाही के समय गब्बू पागलपन का नाटक करें और दासियो के विरुद्ध कुछ ना कहें।

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अगले दिन गब्बू पहुंचा दरबार में। करने लगा पागलों जैसी हरकतें। राजा ने उसे वापस भेज दिया और कहा पागल की गवाही पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। गवाही के अभाव मे राजा ने आदेश दिया दोनों रानी अपनी दासियो को सजा दे। क्योंकि यह पता लगाना बहुत ही मुश्किल है कि झगड़ा किसने शुरू किया।

बड़ी रानी तो बड़ी खुश हुई छोटी को बहुत गुस्सा आया। गब्बू को पता चला कि छोटी रानी मुझसे नाराज है तो वह फिर अपनी सुरक्षा के लिए परेशान हो गया। और फिर पहुंचा दिमाग की दुकान। रोनक ने कहा इस बार दिमाग की कीमत ₹10000।

पैसे लेकर रोनक ने बोला एक ही रास्ता है। तुम वह हार खरीद कर छोटी रानी को उपहार में दे दो। गब्बू हैरान हो गया और बोला ऐसा कैसे हो सकता है। उसकी कीमत ₹100000 है। रोनक बोला था ना उस दिन जब तुम पहली बार आए थे। कि एक रुपए की दिमाग से तुम ₹100000 बचा सकते हो। इधर गब्बू को हार खरीदकर भेंट करना पड़ा। उधर दिमाग की दुकान चलने लगी।

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